छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग की भूमिका
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग(छ.ग.रा.वि.नि.आ.) अपनी भूमिका को न केवल एक नियामक के रूप में बल्कि छत्तीसगढ़ राज्य में बिजली क्षेत्र के प्रवर्तक के रूप में भी मानता है। छ.ग.रा.वि.नि.आ. का प्रयास होगा कि इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाकर, बिजली उद्योग को उचित रिटर्न सुनिश्चित करके और एक खुला प्रतिस्पर्धी माहौल प्रदान करके राज्य में बिजली क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक स्थितियां तैयार की जाएं, ताकि छत्तीसगढ़ राज्य को देश के पावर हब होने होने की शक्ति का एहसास हो सके. छ.ग.रा.वि.नि.आ. बिजली के उत्पादन, पारेषण और वितरण में दक्षता और उपभोक्ताओं को उचित दरों पर बिजली की कुशल आपूर्ति के लिए प्रयास कर रहा है। आयोग इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ऐसी पारदर्शी प्रक्रियांओं का पालन करेगा जो सभी हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करे।
आने वाले वर्षों में आयोग के सामने कई चुनौतीपूर्ण कार्य होंगे क्योंकि वह निम्नलिखित उद्देश्यों को सुनिश्चित करने के लिए खुद को तैयार कर रहा है: -
आयोग के समक्ष कार्यवाहियां
विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 95 के अनुसार आयोग के समक्ष समस्त कार्यवाहियाँ भारतीय दण्ड संहिता (45/1860) की धारा 193 तथा 228 के आशयों के भीतर न्यायिक कार्यवाहियाँ समझी जाएगी और आयोग दण्ड प्रक्रिया संहिता (क्रिमिनल प्रोसीजर कोड, 1973 (2/1974) की धारा 345 तथा 346 के प्रयोजनों के लिये सिविल कोर्ट समझा जायेगा ।